Ayurevedic Treatment for kidney

Ayurevedic Treatment for kidney

भारत में क्रॉनिक किडनी रोग यानी गुर्दे खराब होने की समस्या में तेजी से इजाफा हुआ है, यह बात कई सर्वे से ज्ञान हुआ है। बदलती खान-पान की आदतों और भाग-दौड़ की जिंदगी, प्रदूषित पानी और प्रदूषण की वजह से किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं। नियमित दिनचर्या और संतुलित खानपान को अपनाकर इन रोगों से बचा जा सकता है। लेकिन देश में बढ़ते फास्ट फूड के चलन की वजह से इन बीमारियों को रोकना कठिन हो रहा है।

किडनी की बीमारी कोई भयंकर रूप न लेले, इसलिए शुरुआत में ही किडनी की बीमारी को पहचानना बहुत जरूरी है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में यह एक लाइलाज बीमारी बन सकती है। यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को पहचान लेते हैं तो आपको तुरंत हम से सलाह लेनी चाहिए।

  • किडनी के होने से शरीर से गंद तथा पेशाब बाहर निकलते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता तो किडनी में भरे हुए गंद के कारण आपके हाथ, पैर, टखना एवं चेहरा सूज जाता है।
  • इस अवस्था में मूत्र का रंग गाढ़ा हो जाता है या फिर मूत्र की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है। इसके अलावा बार-बार मूत्र होने का एहसास होता है मगर करने पर नहीं होता है। इसके अन्य लक्षणों में मूत्र त्याग करने के वक्त दर्द, दबाव और जलन जैसा अनुभव होता हो।

  • जब मूत्र में रक्त आने लगे या फिर झाग जैसा मूत्र आए तो बिना सोचे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह किडनी के खराब होने का निश्चित ही संकेत होता है।
  • शरीर में कमजोरी, थकाम या हार्मोन का स्तर गिर जाए तो यह भी किडनी के बीमारी के लक्षण माने गए हैं।
  • ऑक्सीजन का कम होना और जिसके कारण चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आए तो किडनी के बीमारी के लक्षण है।
  • यदि गर्मी में भी ठंडक महसूस हो तथा आपको बुखार हो तो यह किडनी खराब होने के लक्षण को दर्शाता है।
  • किडनी के खराब होने पर शरीर में विषाक्त पदार्थों जम जाते है, जिससे त्वचा में रैशेज और खुजली होने लगती है। हालांकि यह लक्षण कई तरह की बीमारियों में भी पाया जाता है।
  • बहुत कम लोग जातने हैं कि किडनी की बीमारी के कारण खून में युरिया का स्तर बढ़ जाता है। यह युरिया अमोनिया के रूप में उत्पन होता है। जिसके कारण मुंह से बदबू निकलने लगता है और जीभ का स्वाद भी बिगड़ जाता है।
  • गुर्दे खराब होने से शरीर में विषाक्त पदार्थों का स्तर बढ़ जाता है जिसके कारण मतली और उल्टी होने लगता है।
  • डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में अनवांटेड पदार्थ जरूरत से ज़्यादा जम जाने के कारण यह लक्षण महसूस होने लगता है।
  • यदि पीठ का दर्द पीठ के नीचले भाग से होते हुए पेड़ू-जांघ के जोड़ तक फैल जाता है तो समझिए कि आप इस बीमारी के शिकार हो रहे हो।
  • अगर किडनी खराब है तो लंग्स में फ्लूइड जमने लगता है जिसके कारण साँस लेने में असुविधा होने लगती है।

किडनी की बीमारियों के सामान्य लक्षण

चेहरे की सूजन

चेहरे, पेट और पैरों में सूजन, किडनी की बीमारी की ओर संकेत करते है। किडनी की बीमारी की वजह से जो सूजन होती है, आम तौर पर वह बहुत जल्दी नजर आ जाती है। पलकों के नीचे की सूजन जिसे पेरिआरबिटल ऐडीमा कहते हैं, यह सुबह के समय प्रत्यक्ष दिखाई देती है।

किडनी की खराबी का सूजन एक महत्वपूर्ण लक्षण है। लेकिन यह ध्यान में रखना चाहिए कि जरूरी नहीं है कि हमेशा सूजन, किडनी की खराबी का ही कहे संकते है। कुछ बीमारियों में किडनी ठीक होने के बावजूद शरीर में सूजन होती है। उदाः नेफ्रोटिक सिंड्रोम। उतना ही महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि किडनी की खराबी के बावजूद कुछ रोगियों में सूजन नहीं होती है।

भूख की कमी, मितली, उलटी

भूख की कमी, मितली, उलटी, मुँह में असामान्य स्वाद लगना आदि कुछ आम लक्षण हैं। किडनी की बिगड़ती दशा के साथ शरीर में विषाक्त पदार्थों के स्तर में वृद्धि होती जाती है। जिसके फलस्वरूप मितली, उलटी, जी मचलाना और कई बार मरीज को अत्याधिक हिचकियाँ आती है।

उच्च रक्तचाप

किडनी की खराबी के कारण रोगियों में उच्च रक्तचाप होना एक आम लक्षण है। अगर उच्च रक्तचाप कम उम्र में (30 साल से कम) हो जाये या किसी भी उम्र में रक्तचाप जाँच के समय में बहुत अधिक है तो इसका कारण किडनी रोग हो सकता है।

रक्तल्पता या एनीमिया और कमजोरी

जल्दी थकान लगना, शरीर में पीलापन, किडनी की खराबी के आम लक्षण हैं। किडनी की खराबी की प्रारंभिक अवस्था में केवल यही एक लक्षण उपस्थित हो सकता है। अगर उचित उपचार से एनीमिया ठीक नहीं होता है तो यह किडनी की खराबी का संकेत हो सकता है।

रक्तल्पता या एनीमिया और कमजोरी

पीठ के निचले हिस्से में दर्द, शरीर में दर्द, खुजली, और पैरों में ऐंठन किडनी की बीमारियों की सामान्य शिकायतें हैं। मंद विकास, छोटा कद और पैर की हडिड्यों का झुकना आदि, किडनी की खराबी वाले बच्चों में आम तौर पर देखा जाता है।

पेशाब से संबंधित निम्नलिखित शिकायतें हो सकती है:

  1. विभिन्न किडनी रोगों में पेशाब की मात्रा में कमी हो जाती है।
  2. पेशाब में जलन (dysuria ), बार-बार पेशाब आना और पेशाब में रक्त या मवाद (Pus) का आना, पेशाब पथ के संक्रमण का लक्षण हो सकता है।
  3. पेशाब के सामान्य प्रवाह में बाधा/रुकावट, पेशाब करने समय उसकी कमजोर व् पतली धार (stream of urine), पेशाब त्याग करने में कठिनाई, या जोर लगाने की आवश्यकता आदि पेशाब रोग के लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में पेशाब त्याग करने के लिए पूर्ण अक्षमता हो सकती है। किसी व्यक्ति में उपरोक्त लक्षणों और संकेतों में से कई लक्षण उपस्थित हो सकते हैं पर यह जरुरी नहीं है की वह व्यक्ति किडनी की बीमारी से पीड़ित हो। हालांकि इस तरह के लक्षणों की उपस्थिति में डॉक्टर से परामर्श करने की सलाह दी जाती है। रक्त और पेशाब परीक्षण से किडनी की बीमारी का पता चल जाता है।

Note:- यह याद रखना महत्वपूर्ण है की गंभीर किडनी की समस्याएँ किसी भी महत्वपूर्ण लक्षण और संकेत के बिना लम्बी अवधि के लिए चुपचाप मौजूद रह सकती है।

किडनी रोग  में खाने के लिए

  •  तडके  में केवल  सरसो  का तेल कम मात्रा में इस्तेमाल करे
  • परमल की सब्जी हफ्ते में दो या तीनबार खायें
  • घीया, कद्दू,लोकि,टोर्री,टिंडा,टिंडा,बगैर इन सबकी बीजके सब्जी बनाए
  • गाजर,पालक को उबाल कर उनकापानी निकल कर सब्जी बनाए
  • मूँग, मसर व अरहर की दाल दे  सकते हैं,
  • तड़के  में सरसों का तेल ,प्याज,जीरा,धनिया,हल्दी,हरी मिर्च,फीकी अचारवाली,लम्बी मिर्च,तड़के में डाल सकते हैं इसकेआलावा तड़के में  कुछ नहीं डालना
  • कच्चा पनीर खा सकते हैं व  बगैर तला हुआ पनीर किसी भी सब्जी  में डाल सकते हैं
  • अंडे को उबाल कर उसके पीले भाग को निकाल कर सफ़ेद भाग  को खा सकते हैं
  • सलाद में मूली खीरा तर ले सकते हैं
  • फ्रूट में सेब व पपीता छीलकर खाएंजामुन भी खा सकते हैं
  • देसी गाय का दूध व दही खा सकते हैं
  • जो बकरी खेतों में चारा करके आये उसका दूध १००,१५० ग्राम दूध दे सकते हैं
  • दही में कद्दू व गाजर का रायता बना सकते हैं
  • गेंहू की रोटी (बगैर चुपड़ी) खा सकते हैं

किडनी का परीक्षण किसे कराना चाहिए?

किडनी की तकलीफ होने की संभावना कब अधिक होती है? किसी भी व्यक्ति को किडनी की बीमारी हो सकती है। किंतु निम्नलिखित उपस्थित हों तो खतरा ज्यादा हो सकता है।

  • किडनी रोगों के प्रत्यक्ष लक्षण दिखाई देना
  • मधुमेह (डायबिटीज) होना
  • खून का दबाव अनियंत्रित रहना
  • परिवार में वंशानुगत किडनी रोग होना
  • लंबे समय तक दर्द निवारक दवाईयाँ ली गई हों
  • तम्बाकू का सेवन, मोटापा होना या 60 वर्ष से अधिक आयु का होना
  • मूत्रमार्ग में जन्म से ही खराबी होना